बुधवार, 04 नवंबर 2026

Delhi Pollution: दिल्ली का AQI 261 पहुंचा, इस सीजन का सबसे खराब स्तर; बॉर्डर पर वाहनों की जांच, निर्माण कार्यों पर लगी रोक

देश की राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। रविवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 261 दर्ज किया गया। इसके साथ ही राजधानी की हवा इस सीजन के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गई। पिछले करीब छह महीनों में यह दिल्ली का सबसे अधिक AQI है। इससे पहले 17 अप्रैल को AQI 263 दर्ज किया गया था।

दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी में AQI 378 तक पहुंच गया, जबकि शहर के दूसरे हिस्सों में भी हवा की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में बनी रही। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सर्दियों के लिए विशेष नियंत्रण उपाय लागू कर दिए हैं। रविवार से दिल्ली की सीमाओं पर बाहरी वाहनों की जांच शुरू हो गई है। इसके कारण दिल्ली-गुरुग्राम और दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

इस सीजन में सबसे खराब स्तर पर पहुंची दिल्ली की हवा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, 1 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 261 दर्ज किया गया। AQI के मानकों के मुताबिक 201 से 300 के बीच का स्तर खराब श्रेणी में आता है।

दिल्ली के कुल 57 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 22 केंद्रों पर हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 21 केंद्रों पर AQI खराब श्रेणी में रहा। बाकी 14 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई।

जहांगीरपुरी सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल रहा। यहां AQI 378 तक पहुंच गया। इसके अलावा रोहिणी, पंजाबी बाग, आरके पुरम, मुंडका और विवेक विहार जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज किया गया।

दिल्ली बॉर्डर पर वाहनों की जांच शुरू, कई जगह लगा जाम

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से बाहरी वाहनों के प्रवेश को लेकर नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-IV और उससे पुराने उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। हालांकि, इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।

नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर जांच अभियान शुरू किया गया है। दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर और अन्य प्रवेश मार्गों पर पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें वाहनों की जांच कर रही हैं।

पहले दिन जांच के कारण कई जगहों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। कुछ वाहन चालकों को काफी देर तक कतार में इंतजार करना पड़ा।

जांच अभियान में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की भी मदद ली जा रही है। इन कैमरों के जरिए नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान की जा सकती है।

निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर 31 जनवरी तक रोक

दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा कारण निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल भी है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाले बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक लगाई है।

हालांकि, जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के तहत छूट दी गई है।

इसके अलावा 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर और व्यापक प्रतिबंध लागू रहेगा। इसका उद्देश्य सर्दियों के दौरान प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से रोकना है।

पार्किंग शुल्क दोगुना, कार्यालयों में 50 प्रतिशत उपस्थिति का नियम

प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी।

इसके साथ ही सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की फिजिकल उपस्थिति अधिकतम 50 प्रतिशत रखने और बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है।

दिल्ली सरकार के कार्यालयों और नगर निगम के कार्यालयों के कामकाज के समय में भी बदलाव किया गया है, ताकि एक ही समय पर सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सके।

दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों और पराली की कितनी हिस्सेदारी?

दिल्ली के प्रदूषण को लेकर जारी डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के अनुमान के अनुसार, 1 नवंबर को राजधानी के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 16.4 प्रतिशत रही।

वहीं पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 18.5 प्रतिशत आंकी गई। औद्योगिक गतिविधियों की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत, घरेलू स्रोतों की 4 प्रतिशत और निर्माण गतिविधियों की 2.2 प्रतिशत रही।

इसके अलावा सड़क की धूल और ऊर्जा उत्पादन जैसे स्रोत भी प्रदूषण में योगदान दे रहे हैं।

ये आंकड़े मॉडल आधारित अनुमान हैं। प्रदूषण के स्रोतों की हिस्सेदारी मौसम और हवा की दिशा के अनुसार बदल सकती है।

4 नवंबर को बेहद खराब श्रेणी में पहुंच सकती है हवा

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की ओर से जारी 1 नवंबर के वायु गुणवत्ता बुलेटिन में आने वाले दिनों के लिए चिंता जताई गई है।

आधिकारिक पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में 2 और 3 नवंबर को हवा खराब श्रेणी में बनी रह सकती है। वहीं 4 नवंबर को वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका है।

अगले छह दिनों के पूर्वानुमान में भी दिल्ली की हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी के बीच रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में फिलहाल राजधानी के लोगों को प्रदूषण से जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है।

बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत

बढ़ते वायु प्रदूषण का असर सबसे अधिक बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसे लोग अधिक प्रदूषण वाले समय में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। बाहर जाने की जरूरत होने पर अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें। आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

फिलहाल दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि, केवल वाहनों की जांच या निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए दिल्ली के साथ-साथ पूरे NCR में प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर लगातार कार्रवाई की जरूरत होगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार के इन उपायों से राजधानी की हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार होता है।
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